साल दर साल बढ़ रहा है धरती का तापमान, अंटार्कटिका में रिकॉर्डतोड़ गर्मी

by Renu Garia 3 months ago Views 2183
Earth's temperature is increasing all year, record
धरती का तापमान साल दर साल बढ़ रहा है. यूरोपियन एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक जनवरी 2020 अब तक का सबसे गर्म महीना रहा है। एजेंसी के मुताबिक धरती के सबसे गर्म साल पिछले 5 पांच साल ही रहे हैं। नए आंकड़ों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. 

जलवायु परिवर्तन पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक दुनिया लगातार गर्म हो रही है। कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के मुताबिक बीती जनवरी का तापमान साल 1981 से 2000 के बीच दर्ज़ किये गए जनवरी के सामान्य तापमान से 0.77 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। यह अब तक का सबसे ज़्यादा गर्म महीना साबित हुआ है. इससे पहले 2016 का जनवरी महीना सबसे गरम था और 2017 का जनवरी दूसरे नंबर पर था।  

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यूरोप की बात की जाए तो जनवरी 2020 का तापमान पिछले तीस साल के जनवरी के सामान्य तापमान से 3.1 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। नॉर्वे से रूस तक के इलाकों में भी जनवरी का तापमान सामान्य से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है, जिससे पिछले 30 सालो का रिकॉर्ड टूट गया है।  

दुनिया के कई और हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है जिसमे अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिणपूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। नए आंकड़े बताते हैं कि अब तक के सबसे गर्म 7 साल 2010 से 2019 के बीच दर्ज किये गए हैं और आजतक के सबसे गर्म साल पिछले 5 पांच साल ही रहे हैं। 

अर्जेंटीना के मौसम विभाग के मुताबिक बीते गुरुवार को अंटार्कटिका में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की गयी।वहां तापमान 18.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ हुआ जो अब तक का सबसे ज़्यादा तापमान है. अर्जेंटिना के मौसम विभाग के मुताबिक अंटार्कटिका का तापमान 1961 से रिकॉर्ड किया जा रहा है, और 18.3 डिग्री सेल्सियस तापमान अब तक सबसे ज़्यादा है. इससे पहले मार्च 2015 में अंटार्कटिका का तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 2019 के एक शोध के मुताबिक 2014 से अंटार्टिका में बर्फ तेज़ी से पिघल रही है।

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हाल के वर्षों में पूरी दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं का भयावह रूप सामने आया है. चाहे अमेज़न या ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग हो या फिर मोज़ाम्बिक या बारबडोस के विनाशकारी तूफ़ान हों।

ऐसे में दुनियाभर से मौसम विज्ञानियों में यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या बढ़ता तापमान दुनियाभर के लिए आपातकाल की स्थिति है और क्या अब हर देश को अपनी सीमाओं से परे जाकर बढ़ते तापमान को रोकने के लिए लड़ना होगा. 

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