चमगादड़ और कोरोनावायरस, क्या है सच ?

by GoNews Desk 1 month ago Views 126479
Bats and coronaviruses, what is the truth?
दुनियाभर के लोग आज तक की सबसे बड़ी महामारी से जूझ रहे है। एक तरफ वैज्ञानिक जानवरों से मनुष्यों में आने वाले इस वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मीडिया के कई चैनलों ने रिसर्च से पहले ही COVID -19 फैलाने के लिए चमगादड़ को दोषी ठहरा दिया है। इसके बाद अलग अलग जगह से लोगों द्वारा अपने पड़ोस से पंखों वाले इस स्तनधारियों को मारने या हटाने की मांग में उछाल आया है।

इस पारिस्थितिक संकट का जवाब देते हुए, दक्षिण एशिया के चमगादड़ शोधकर्ताओं और संरक्षणवादियों का एक समूह चमगादड़ के प्रचलित भय और COVID-19 से उनके संबंध को बताने के लिए आगे आया है।

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6 दक्षिण एशियाई देशों के 64 काइरोप्रेटोलॉजिस्ट ने ये स्पष्ट किया हैं कि चमगादड़ COVID-19 को नहीं फैलाते हैं। उन्होंने इसके लिए ये तर्क दिया है कि SARS-CoV-2 (नावेल कोरोनावायरस) की सटीक उत्पत्ति पता नहीं चली है। यह कहना ठीक है की 40-70 साल पहले RaTG13 नामक चमगादड़ में पाए गए निकटतम कोरोनावायरस से अलग हुआ है, जो दर्शाता है कि बैट वायरस मनुष्यों को सीधे संक्रमित नहीं कर सकता है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के एक हालिया अध्ययन में भारतीय चमगादड़ों की दो प्रजातियों में बैट कोरोना वायरस (BtCoV) पाया गया। यह समूह स्पष्ट करता है कि ये खतरे का कारण नहीं है क्योंकि ये BtCoVs SARS-CoV-2 के समान नहीं हैं और चमगादड़ COVID-19 का कारण नहीं बन सकता हैं। चमगादड़ के मल भी मनुष्यों के लिए कोरोना वायरस फैलाने का खतरा पैदा नहीं करते हैं। यदि चमगादड़ वायरस फैलाने का कारण नहीं हैं, तो इस महामारी का क्या कारण है?

डॉ अरिन्जय बनर्जी जो कनाडा में मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के एक पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता है जो बैट वायरस का अध्ययन करते हैं और उस टीम का हिस्सा थे जिसने COVID-19 वायरस को अलग किया था, उन्होंने बताया की “मानव गतिविधियों और वन्यजीवों के आवासों का अतिक्रमण हमें नए वायरस से सामना करने के जोखिम में डालता है। ये वायरस किसी भी वन्यजीव प्रजाति से आ सकते हैं और जरूरी नहीं कि सिर्फ चमगादड़ ही हों।

इसीलिए हमें नए रोग पैदा करने वाले जीवों के अभाव को रोकने के लिए मानव प्रथाओं को बदलने की आवश्यकता है।” मानव-वन्यजीव इंटरफ़ेस, वैश्विक वन्यजीव व्यापार और औद्योगिक पशुधन खेती को बदलना वर्तमान की स्थितियों और पिछली महामारियों का सबसे बड़ा कारण हैं।

चमगादड़ हमारे आर्थिक मूल्य के पौधों के फूलों को परागित करते हैं, एक मजबूत तटीय ढाल का निर्माण भी करते हैं। कीट खाने वाले चमगादड़ कृषि संबंधी वृक्षारोपण में मच्छरों और कीड़ों को खाते हैं, जिससे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा और हमारे स्वयं के स्वास्थ्य में योगदान होता है। लेकिन दुर्भाग्य से, चमगादड़ के महत्व को कानून द्वारा उचित मान्यता नहीं दी गई है।

बैट कंजर्वेशन ट्रस्ट के प्रमुख राजेश पुत्तास्वामी ने कहा की “भारत में चमगादड़ों की 110 से अधिक प्रजातियां भारत में असुरक्षित हैं, जिनमें गंभीर रूप से लुप्तप्राय कोलार लीफ-नॉटेड बैट भी शामिल है। समय आ गया है कि भारत सरकार इन प्रजातियों को संरक्षण दे। ”


Content partner - National Centre for Biological Sciences (NCBS)

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