GoPlus - एक नज़र आज की बड़ी ख़बरों पर

by Rupali Tewari 3 months ago Views 1661
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GoPlus: एक नज़र आज की बड़ी ख़बरों पर


Also Read: दिल्लीवालों ने पेश की इंसानियत की शानदार मिसालें, दंगाइयों के हौसले पस्त हुए

सांप्रदायिक हिंसा की आग में तीन दिन तक झुलसने के बाद , चौथे दिन , हिंसाग्रस्त उत्तर पूर्वी इलाक़े में हालात में , थोड़ा सुधार हुआ है .  सुबह से ही दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों ने  , प्रभावित इलाक़ों में फ्लैगमार्च शुरू कर दिया , तो शाम तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी , ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने पहुंच गए. अब सवाल यही उठ रहा है , कि देश की सबसे चुस्त दुरस्त दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में , तीन दिन तक हिंसा का खुला खेल , कैसे चलता रहा…


यह सच है कि राजधानी दिल्ली का एक हिस्सा , तीन दिन तक जलता रहा. दंगाइयों ने हत्या करने के साथ-साथ , जमकर लूटपाट औक आगज़नी की , और दिल्ली पुलिस इसे रोक पाने में बुरी तरह फेल साबित हुई. दिल्ली पुलिस पर यह भी आरोप है , कि सांप्रदायिक हिंसा के इस मामले में उसकी भूमिका , तमाशबीन की बनी रही. यही वजह है कि दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर और तलवंत सिंह ने , दिल्ली पुलिस को जमकर फटकार लगाई , और हिंसा भड़काने से पहले , भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर , एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. दिल्ली हाई कोर्ट ने आज और क्या क्या कहा , बता रहे हैं हमारे सहयोगी सिद्धार्थ पांडेय 


कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने , उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के लिए गृह मंत्री अमित शाह को ज़िम्मेदार ठहराया है और उनके इस्तीफे की मांग की है।  सोनिआ गाँधी ने कहा  कि दिल्ली में कुछ दिनों से हो रही हिंसा , सोची समझी साज़िश के तहत हो रही है. बीजेपी के नेताओं ने भड़काऊ बयान देकर इस हिंसा को भड़काया है. वहीं बीजेपी ने सोनिया गांधी पर पलटवार किया है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि ऐसे माहौल में कांग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए

 

4.  SID WT ON SUPREME COURT ON DELHI POLICE - SC QUESTIONS POLICE RESPONSE 

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ 74 दिन से , दिल्ली-नोएडा रोड पर , शाहीन बाग़ की महिलाओं का धरना चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कई बार सुनवाई कर चुका है , लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला . सुनवाई के लिए अब नई तारीख़ 23 मार्च दे दी गई है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने , दिल्ली में जारी हिंसा पर चिंता ज़ाहिर की , और दिल्ली पुलिस की भूमिकर पर गंभीर सवाल खड़े किए. सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ, हमारे सहयोगी सिद्धार्थ पांडेय बता रहे हैं…


विधानसभा चुनाव के वक़्त से ही , बीजेपी के नेता , राजधानी दिल्ली की फिज़ा बिगाड़ने में लगे हुए थे , और तमाम शिक़ायतों के बावजूद दिल्ली पुलिस ने , भड़काऊ बयान देने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं की. भड़काऊ बयानों के लिए बदनाम बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने बीते रविवार को भी , जाफ़राबाद के प्रदर्शनकारियों को धमकी दी थी,  जिसके बाद हिंसा का तांडव शुरू हो गया. अब तमाम विपक्षी दलों ने कपिल मिश्रा समेत , भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर कार्रवाई की मांग की है…


दिल्ली में हिंसा के ख़िलाफ़ , आज  कांग्रेस पार्टी ने  रियंका गाँधी के अगवाई में , राजपथ की ओर एक शांति मार्च निकाला , लेकिन  इस मार्च को  बीच रास्ते में रोका गया।  हमारे सहयोगी अजय झा की रिपोर्ट


दिल्ली के जंतर मंतर पर वाम दलों, सिविल सोसाइटी समेत , साथणिया लोगों ने एक पीस प्रोटेस्ट किया।  प्रदर्शन के दौरान सभी लोगों ने दिल्ली की जनता से , शांति बनाये रखने की अपील की।  लोगों का कहना था कि दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में आर्मी की तैनात कर देना चाहिए।  इस बारे में दिल्ली के जंतर मंतर से ज्यादा जानकारी दे रहीं है गोन्यूज़ संवादाता अंजलि ओझा। 


राजधानी दिल्ली का एक हिस्सा पिछले 4 दिनों से सांप्रदायिक हिंसा की आग में धधक रहा है लेकिन हिंसाग्रस्त इलाकों से ही हिन्दू-मुस्लिम एकता की तमाम मिसालें सामने आई हैं. दंगाइयों को भगाने के लिए दोनों समुदायों ने अपने-अपने मुहल्ले में शांति मार्च निकाले तो रात-रातभर जागकर दूसरों के घरों, दुकानों की हिफाज़त की। नफरत के इस माहौल में दिल्लीवालों ने कैसे इंसानियत को तरजीह दी, देखिये ये ख़ास रिपोर्ट 


उत्तर पूर्वी दिल्‍ली में तीन तक चली हिंसा के चलते , प्रभावित इलाक़ों में , बोर्ड एग्ज़ाम टाल दिया गया है. जिन हिस्सों में बोर्ड एग्ज़ाम चल रहे हैं, वहां पहुंचे बच्चों और पेरेंट्स ने इसपर चिंता ज़ाहिर की. बच्चों ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ऐन वक़्त पर एग्ज़ाम टलना उनकी मुश्किलें बढ़ाने वाला है. 


देश की क़ानून व्यवस्था में सुधार होने की बजाय स्थिति , बिगड़ती जा रही है. ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च डिवलेपमेंट के नए आंकड़े बताते हैं , कि देश में ऐसे भी पुलिस थानें है , जहां ना तो गश्त के लिए गाड़ियां है , और ना ही टेलीफोन-वायरलेस जैसे सुविधा है. ऐसे में अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है , कि देश में कानून व्यवस्था इतनी चौपट क्यों है…


 कहते हैं ,  अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो , तो कोई भी परेशानी आपका रास्ता नहीं रोक सकती । अपने हौसले के दम पर आप हर मुश्किल को आसान कर सकते हो।और ऐसा ही कुछ कर रही है, बरेली की 10वीं की छात्रा  साफिया जावेद। जो फेफड़े की बीमारी से जूझने के साथ , ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ , बोर्ड एग्जाम दे रही हैं।

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