2020 बिहार विधानसभा में बीजेपी से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है जदयू

by Nuruddin 1 month ago Views 3754
JDU can contest more seats than BJP in 2020 Bihar
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झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी को शिकस्त मिलने के बाद अब 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा और बीजेपी के मुक़ाबले 2004 से 2009 तक पार्टी ने ज़्यादा सीटों पर जीत दर्ज की। उन्होंने कहा कि बिहार में जदयू बड़ी पार्टी है और ऐसा संभव नहीं है कि जदयू और भाजपा बराबर सीटों पर चुनाव लड़े।

प्रशांत किशोर ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार बिहार का चेहरा हैं। जेडीयू साल 2004 से एक बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। उन्होंने कहा कि जेडीयू ने बीजेपी के साथ गठबंधन में भी बड़ी पार्टी के रूप में चुनाव लड़ा है। उन्होंने कहा कि 2004 से 2009 तक पार्टी ने बीजेपी से ज़्यादा सीटें जीती हैं। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा में जेडीयू के 70 विधायक हैं जबकि बीजेपी के पास लगभग 50 हैं।

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बता दें कि 2015 विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने कांग्रेस और आरजेडी सहित अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ महागठबंधन में चुनाव लड़ा था। जिसमें आरजेडी को 81, जेडीयू को 70 और कांग्रेस को 26 सीटें मिली थीं। लेकिन कुछ मतभेद के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ जाना बेहतर समझा। इसको लेकर राजद की ओर से नीतीश कुमार को ज़बरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा।

2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने लोजपा और बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा। जिसमें जेडीयू और बीजेपी ने बराबर 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी थी। चुनाव में बीजेपी को 17 और जनता दल युनाइटेड को 16 सीटों पर जीत मिली। वहीं बीजेपी गठबंधन की एक और पार्टी लोजपा को सभी 6 सीटों पर जीत मिली थी।

इस बीच केन्द्र सरकार के नागरिकता क़ानून का पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने विरोध किया है। उन्होंने कहा कि जेडीयू, सीएए और एनआरसी के समर्थन में नहीं है। संसद के दोनों सदनों में जनता दल युनाइटेड ने नागरिकता क़ानून के समर्थन में वोट किया था। लेकिन प्रशांत किशोर ने कहा कि दोनों सदनों में समर्थन का उद्देश्य सीएम नीतीश कुमार ही बता सकते हैं।

बता दें कि नागरिकत क़ानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़ंस के विरोध में प्रशांत किशोर ने पार्टी से इस्तीफा देने तक की पेशकश कर दी थी। इस बीच प्रशांत किशोर ने नागरकिता जनसंख्या रजिस्टर का भी विरोध किया है। उन्होंने एनपीआर को एनआरसी की ओर पहला कदम बताया। उधर सीएम नीतीश कुमार ने साफ किया है कि पार्टी एनआरसी के ख़िलाफ है। उन्होंने कहा कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा।

प्रशांत किशोर ने पिछले चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस और शिवसेना के लिये काम किया था। अब चर्चा है कि वो दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिये चुनावी रणनीति बनाएंगे। बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2020 तक में हो सकता है।