रघुबर दास छोड़ गए है हेमंत सोरेन के सामने चुनौतियों का अंबार

by Ankush Choubey 2 months ago Views 2667
NEW JHARKHAND GOVT INHERITS ECONOMIC MISERY
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झारखण्ड विधानसभा चुनाव में जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने बीजेपी को शिकस्त दे दी है. अब जेएमएम के हेमंत सोरेन राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं लेकिन उनके सामने चुनौतियों का अंबार है. भुखमरी और बेरोज़गारी के मोर्चे पर झारखण्ड का औसत राष्ट्रीय औसत से भी काफी ख़राब है।

जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी महागठबंधन ने झारखण्ड विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है। लेकिन हेमंत सोरेन की नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां है क्योंकि बीजेपी की रघुबर सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान राज्य तकरीबन सभी मोर्चों पर पिछड़ गया है। साल 2014 में रघुबर दास ने जब सत्ता संभाली तो राज्य पर कुल 37 हजार 593 करोड़ का कर्ज था जोकि इस वक़्त 85 हजार 234 करोड़ हो गया है। रघुबर दास ने पिछले पांच सालों में 47,641 करोड़ का कर्ज लेकर राज्य पर अधिक बोझ डाल दिया है।       

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झारखंड भारत के सबसे गरीब राज्यों में से एक है और देश में जो आर्थिक मंदी है उसकी वजह से झारखण्ड देश के बाकी राज्यों की तुलना में बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मल्टिडाइमेंशनल पोवर्टी इंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं द्वारा झारखण्ड में गरीबी और भुखमरी पर तैयार की गई रिपोर्ट में पता चला है कि 2015-16 में झारखंड भारत का दूसरा सबसे गरीब राज्य था। झारखण्ड में 46% लोग गरीबी और भुखमरी की चपेट में हैं जबकि गरीबी और भुखमरी का राष्ट्रीय स्तर पर औसत  28% है।  राज्य के कुल 24 जिलों में से 6 जिले ऐसे हैं जहाँ ये आंकड़ा 57% से 66 % के बीच है।

झारखंड में बेरोजगारी राष्ट्रीय स्तर पर एनएसओ के आंकड़ों से काफी अधिक है। राज्य में कुल बेरोज़गारी दर 7.5 % रही जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसी दौरान ये 6% रही। राज्य में ग्रामीण इलाको में बेरोजगारी 6.8 % रही जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये 5.3 % रही। झारखंड में शहरी इलाकों में 10.4 % रही जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये 7.7% रही। वहीं राज्य में युवओं में बेरोज़गारी दर 20. 4 % है जबकि इसी दौरान राष्ट्रीय स्तर पर ये 17.8% रहीं।

इसके आलावा अगर हम झारखण्ड में टेलिडेन्सिटी यानी कनेक्टिविटी के बात करे तो झारखंड की हालत यहाँ भी खबर है। टेलिडेन्सिटी के मामले में झारखण्ड बिहार और छत्तीसगढ़ से भी पीछे है। झारखंड में कुल 63.07% टेलिडेन्सिटी हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये 92% है. वहीं झारखण्ड के ग्रामीण इलाकों में ये महज़ 41.86 % है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 59 % है। ये आंकड़े बताते है कि झारखण्ड की नई जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन वाली नई सरकार के लिए इन सब से उबर पाना आसान नहीं होगा।