दिल्ली हिंसा पर अंतराष्ट्रीय संगठनों ने क्या कहा?

by M. Nuruddin 3 months ago Views 3254
What did international organizations say about Del
नागरिकता क़ानून को लेकर भड़के दिल्ली दंगों पर कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। जहां यूनाइटेड नेशंस ने पुलिस और सुरक्षा बलों से संयम बरतने और प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की छूट देने की बात कही, वहीं 57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी ने भी राजधानी में हुई हिंसा को जघन्य करार दिया। नागरिकता क़ानून पर पहले भी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने कई आशंकाए व्यक्त की थी।


देश की राजधानी में हुए दंगों ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींचा है। दिल्ली में हुई हिंसा और आगज़नी को लेकर अब कई अंतराष्ट्रीय संगठन बयान जारी कर केन्द्र सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। दुनिया के तमाम मुल्कों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूएन ने मांग की है कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

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यूएन महासचिव एंटेनियो गुटरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिफ ने कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा पर वे नज़र बनाए हुए हैं और पुलिस और सुरक्षा बलों को संयम दिखाना चाहिये। यूएन चीफ एंटेनियो गुटरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिफ ने मीडिया को संबोधित करते हुए ये बात कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हो रही हिंसा पर युनाइटेड नेशन बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं।

57 मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी ने भी दिल्ली हिंसा को जघन्य करार दिया है और हिंसा भड़काने वाले अपराधियों पर कार्रवाई की मांग की है। ओआईसी ने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मुस्लिम नागरिकों और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की।

इसके अलावा, अमरीकी सरकारी संस्थान यूएससीआईआरएफ ने कहा कि दिल्ली में हुई अनियंत्रित हिंसा जारी नहीं रह सकती। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर अनुरिमा भार्गव ने बयान जारी कर कहा कि भारत सरकार को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए यूएससीआईआरएफ कमिश्नर ने कहा कि मुसलमानों पर हो रहे हिंसक हमलों में पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया है और सरकार अपने नागरिकों की हिफाज़त करने में पूरी तरह फेल रही है।”

वीडियो देखिये

बता दें कि अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानि यूएससीआईआरएफ ने साल 2019 की रिपोर्ट में भारत में धार्मिक आज़ादी न होने का आरोप लगाकर टियर-2 की कैटगरी वाले देशों में शामिल कर दिया है। ज़ाहिर है कि देश में लगातार हो रही हिंसा से भारत के अंतराष्ट्रीय साख़ को धक्का लगा है।

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